बचपन में ही चल पड़े अपराधों की राह, सरकारी सबक भी बेकार

– दिसम्बर, 18 से जनवरी, 20 तक साढ़े सात हजार से अधिक मामले दर्ज
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भुवनेश पंड्या
उदयपुर. ये ऐसे बच्चे हैं जो बचपन childhood में ही अपराधों की राह चल पड़े हैं। चाहे पारिवारिक मजबूरी की बेडिय़ों ने उन्हें अपराध की ओर मोड़ दिया हो या खुद आदतन इस भंवर में कूद पड़े हो, जो भी है, बाल अपराधों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। दिसम्बर, 2018 से जनवरी, 2020 तक बाल अपराधों के प्रदेश में 7515 प्रकरण दर्ज हुए, इनमें से 4173 प्रकरणों में चालान एवं 2503 प्रकरणों में एफ आर पेश की गई एवं शेष 839 प्रकरणों में जांच की जा रही है।
——बाल अपराधों की रोकथाम के लिए सरकार की तैयारी crimes started in childhood
– बाल अपराधों की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा लेंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत दर्ज प्रकरणों की समीक्षा के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय टास्क फ ोर्स का गठन किया गया हैं।- पुलिस मुख्यालय द्वारा पोक्सो एक्ट pocso act के तहत दर्ज प्रकरणों का प्रभावी पर्यवेक्षण किया जा रहा है।
– पुलिस मुख्यालय स्तर पर अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस सिविल राइटस एवं एएचटी राजस्थान जयपुर द्वारा बलात्कार, पोक्सो एक्ट के एक वर्ष से अधिक लम्बित प्रकरणों की अनुसंधान पत्रावलियों की समीक्षा करवाई जा रही है।- पोक्सो एक्ट के प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के लिए राज्य में 56 पोक्सो कोर्ट खोले गए हैं।
– बालकों की समस्याओं को सुनने के लिए राज्य के प्रत्येक पुलिस जिले में महिला एवं बाल डेस्क की स्थापना की गई हैं।- राज्य के समस्त 42 पुलिस police जिलों में मानव तस्करी विरोधी एवं गुमशुदा व्यक्ति प्रकोष्ठ गठित किए गए। इसके अतिरिक्त राज्य में बालश्रम व मानव तस्करी से प्रभावित 7 स्थानों भिवाड़ी, अजमेर में ब्यावर, जयपुर में कोटपूतली, गंगानगर में अनूपगढ़, उदयपुर udaipur में कोटड़ा, भीलवाड़ा में जहाजपुर और बांसवाड़ा में कुशलगढ़ को चिह्नित कर 7 नवीन मानव तस्करी विरोधी यूनिट स्थापित की जाएगी।
– गुमशुदा व्यक्तियों की तलाश एवं बालश्रम की रोकथाम के लिए वर्ष 2019 में पुलिस मुख्यालय स्तर से 4 विशेष अभियान सम्पूर्ण राज्य में संचालित कर कुल 2219 बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराया गया। 1023 गुमशुदा बच्चों को दस्तयाब किया गया एवं कुल 348 नियोक्ताओं के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की गई। 1200 बच्चों को पुनर्वास के लिए भेजा गया।—–
दिसम्बर, 2018 से जनवरी, 2020 तकऐसे सामने आए संभागीय जिलों में बाल अपराधी
उदयपुर – 501अजमेर- 461
बीकानेर- 197भरतपुर- 143
जयपुर- 1295जोधपुर- 386
कोटा- 460——
बाल अपराध के नजरिए से बड़े जिलेभीलवाड़ा- 471
झालावाड़- 401श्री गंगानगर- 302
बारां- 283—–
ये उठाया बड़ा कदमप्रदेश में महिलाओं व बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर लगाम कसने के लिए अजमेर, बीकानेर, जोधपुर उदयपुर में कार्यरत पुलिस सहायता परामर्श केन्द्र पर पदस्थापित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गत वर्ष स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट के प्रभारी बनाए गए हैं

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