इसे कहते हैं भरे सागर घोंघा प्यासा…

गांव में जलाशय, सिंचाई के किसानों को एक बूंद नहीं मिल रहा पानी, ढीमरखेड़ा क्षेत्र का सगौना गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित, युवाओं के हाथ को नहीं रोजगार, जिम्मेदारों की नहीं पड़ रही नजर
इसे कहते हैं भरे सागर घोंघा प्यासा…
कटनी/ढीमरखेड़ा. ‘भरे समुद्र में घोंघा प्यासा’ यह बात तो आपने कई बार सुनी होगी। इसी तरह के कुछ हालात हैं ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र के ग्राम सगौना की। ढीमरखेड़ा तहसील मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर दूर जंगल के बीच सगौना वासी मूलभूत सुविधाओं के लिए महरूम तो हैं ही साथ बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए भी बाट जोह रहे हैं। ग्रामीण दीपक रजक, चंद्रभान यादव, सरस्वती यादव, मीना बाई यादव, प्रदीप सिंह, नरेश सिंह, सोहन सिंह, कंधी सिंह, गुमान सिंह, कृष्णा बाई, संतराम सिंह, मदन सिंह आदि की मानें तो गांव में भारी-भरकम जलाशय जल संसाधन विभाग द्वारा बनाया गया है, लेकिन गांव के किसानों से इस जलाशय से सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा। किसानों का कहना है कि यदि लिफ्ट आदि सिस्टम से नहरों के द्वारा खेतों तक पानी पहुंचने लगे तो गांव की दिशा और दशा बदल सकती है। ग्रामीणों ने कई बार अवाज उठाई, लेकिन उनकी कोई नहीं सुन रहा।नरेश सिंह, सोहन सिंह, कंधी सिंह, गुमान सिंह आदि ने बताया कि यह गांव लभगग जंगल से घिरा हुआ है, ऐसे में उनके द्वारा खून-पसीना बहाकर बोई गई फसल को बचाना बहुत बड़ी चुनौती है। जंगली एरिया के कारण शूकर सहित अन्य वन्यप्राणी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे उनको भारी क्षति हो रही है। गांव की कई एकड़ शासकीय भूमि पर अतिक्रमण है इस पर भी कार्रवाई नहीं हो रही। रोजगार के बिल्कुल साधन नहीं है। बिजली कटौती से पूरा गांव परेशान हैं। सिंचाई, घरेलू कामकाज, बच्चों की पढ़ाई बाधित रहती है, इसके बाद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा। नलजल योजना की मांग पर भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे।
ग्राम-सगौनाग्राम पंचायत-सगौनाआबादी-1000तहसील-ढीमरखेड़ा
युवाओं के हाथ को नहीं रोजगारगांव के युवाओं ने पत्रिका से चर्चा के दौरान पीड़ा बयां की। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन और अब अनलॉक में भी रोजगार के लिए परेशान हैं। यह समस्या वर्षों से है। पलायन से किसी तरह जिंदगी चलती है, इस समय बाहर भी नहीं जा पा रहे। 10 अगस्त 2016 को सीएम ने ढीमरखेड़ा क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने घोषणा की थी, उस दिशा में अबतक कोई पहल होती नहीं दिख रही।
किसान नहीं करा पा रहे मृदा परीक्षणगुमान सिंह, संतराम सिंह आदि ने बताया कि गांव के समीप ही रामपुर में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला बनी थी। वह खंडहर हो गई है। यदि किसानों को मिट्टी परीक्षण कराना हो तो फिर नहीं हो पा रही। शहर लेकर जाने में समय, रुपयों आदि की बर्बादी होती है। मृदा परीक्षण खुल जाए तो आसपास के कई गांव के किसानों को लाभ मिलने लग जाएगा। क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाएं भी लचर हैं, जिनको सुदृढ़ करना बेहद आवश्यक है।
इनका कहना हैग्रामीण को यदि सिंचाई की समस्या है तो इस मामले को दिखवाया जाएगा। अतिक्रमण मामले की जांच हो गई है। जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है। बिजली कटौती के लिए जेइ को फटकार लगाते हुए क्षेत्र की समस्या का समाधान करने कहा है। नलजल योजना सहित अन्य विकास कार्य के संबंध में शीघ्र पहल की जाएगी। प्रस्ताव शासन-प्रशासन को भेजे जाएंगे।सपना त्रिपाठी, एसडीएम ढीमरखेड़ा।

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