सितंबर का बढ़ता तापमान किसानों के लिए बना मुसीबत, मौसम विभाग ने अलर्ट किया जारी

Highlights
कृषि वैज्ञानिकों ने फसल बोने से किया किसानों को मना
15 अक्टूबर से फसल बोने की सलाह दे रहे वैज्ञानिक
धान में भी मौसम का असर पड़ने की पूरी संभावना

मेरठ। मौसम में आए बदलाव का असर अब जिले में किसानों पर भी पड़ रहा है। कृषि विभाग ने अब किसानों को 15 अक्टूबर तक फसल न बोने की सलाह दी है। दरअसल तापमान में वृद्धि बनी हुई है। वह कम नहीं हुई। सितंबर का महीना खत्म होने को है। अधिकतम तापमान 36-37 डिग्री पर ही बना हुआ है। वहीं न्यूनतम भी 27 पर टिका है। ऐसे में बढ़ता तापमान फसली मौसम के लिए ठीक नहीं है।
मौसम में अचानक आये बदलाव के बाद जिले में तैयार हो रही धान की फसल पर खतरे के बादल मड़राने लगे हैं। धान के साथ ही अन्य फसल तैयार होने की स्थिति में पहुंच रही हैं तो अन्य फसलों की कटाई का समय आ चुका है। सबसे खराब स्थिति धान की फसलों की मानी जा रही है क्योंकि मानसून की बेरूखी के चलते अधिकांश स्थानों पर बोनी का काम देरी से पूरा हुआ और अभी तक उसमें दाने लगने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई है। हालांकि परम्परागत किस्मों में बालियां भी दिखने लगी है पर हाइब्रिड किस्मों में कीट-व्यााधि का प्रकोप भी दिखने लगा है। यह सब मौसम की बेरूखी के कारण हुआ है।
मेरठ से मानसून की विदाई हो चुकी है। दिन के तापमान में वृद्धि दिख रही है तो रात का पारा स्थिर है। यह मौसम धान की फसलों के अनुकूल नहीं है। इस समय कृषि वैज्ञानिकों की टीम खेतों में घूम रही है और उनके अनुसार अधिकांश खेतों में पानी नहीं है और दरारें दिखने लगी हैं। ऐसी स्थिति में फसलों के सूखने का खतरा उत्पन्न हो गया है। इसके अलावा जिन खेतों में पानी जमा भी है उसके गर्म होने का बुरा प्रभाव धान की फसल पर पड़ रहा है।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि पानी न गिरने और तापमान बढ़ने से अधिकांश स्थानों पर धान की फसलों में इस समय जीवाणु जनित पत्ती झुलसा रोग, ब्लास्ट रोग, हरा एवं सफेद फुदका कीट तथा पत्ती लपेटक कीट की सूड़ियों का प्रकोप स्पष्ट देखा जा रहा है। धान बोनी का काम भी देरी से हुआ है। अभी धान में दाने पड़ने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई। ऐसी स्थिति में कीट-व्याधि का प्रकोप उसके उत्पादन को प्रभावित करेगा। माना जा रहा है किसी भी हालत में धान की फसल अक्टूबर के बाद ही कटने लायक होगी। रोग और कीटों की समस्या हाइब्रिड किस्म की फसलों में ही दिख रही है। कृषि वैज्ञानिकों ने कहा है कि आगामी 15 अक्टूबर के बाद ही किसान खेतों में फसल की बुवाई करें।

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