पीडीएस भ्रष्टाचारः उत्तर प्रदेश अव्वल, फिर बिहार और दिल्ली

पीडीएस भ्रष्टाचारः उत्तर प्रदेश अव्वल, फिर बिहार और दिल्ली

नई दिल्ली। केंद्र सरकार को मंगलवार को प्राप्त भ्रष्टाचार की शिकायतों से मिली जानकारी कुछ चौंकाने वाले खुलासे करती है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में भ्रष्टाचार की शिकायतों के मामले में तो उत्तर प्रदेश इस सूची में सबसे अव्वल नंबर पर आता है। जबकि दूसरे पायदान पर बिहार और तीसरे पर राजधानी दिल्ली का नाम है।
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री रावसाहेब पाटिल दानवे ने मंगलवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में ने बताया कि इस साल 31 अक्टूबर 2019 तक पीडीएस में भ्रष्टाचार की कुल 807 शिकायतें मिली हैं। इनमें सबसे अधिक 328 शिकायतें उत्तर प्रदेश से आई।
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गौरतलब है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में घोटाले के लिए उत्तर प्रदेश पहले भी कई बार सुर्खियों में रहा है। प्रदेश में करोड़ों रुपये के खाद्यान्न घोटाले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 2014 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को प्रदेश के तत्कालीन कैबिनेट मंत्री रघुराज प्रताप सिंह ऊर्फ राजा भैया की भूमिका की जांच करने का निर्देश दिया था।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से सांसद रवि किशन और आगरा से सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया ने अतारांकित प्रश्न पूछकर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री से जानना चाहा कि क्या खाद्य वितरण के मामले में आई शिकायतों में उत्तर प्रदेश भी शामिल है।
सांसदों ने इन शिकायतों के ब्योरे के साथ-साथ इस पर लगाम लगाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी। साथ ही, उन्होंने सरकार द्वारा इसके स्थायी समाधान के लिए लाई गई योजना के बारे में भी जानकारी मांगी।
मंत्री ने इन प्रश्नों के जवाब में बताया कि उत्तर प्रदेश में पीडीएस में भ्रष्टाचार के सबसे ज्यादा 328 शिकायतें आई हैं, जबकि दूसरे स्थान पर बिहार है जहां से 108 शिकायतें आई हैं। दिल्ली तीसरे स्थान पर है जहां से 78 शिकायतें आई हैं।
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वहीं, पश्चिम बंगाल से 48 शिकायतें मिली हैं। जिन राज्यों से कोई शिकायत नहीं मिली है उनमें मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, सिक्किम शामिल हैं। इसके अलावा, केंद्र शासित प्रदेश अंडमान निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, दादर नागर हवेली और लक्ष्यद्वीप से भी कोई शिकायत नहीं मिली है।
मंत्री ने बताया कि पीडीएस (कंट्रोल) आदेश 2015 के प्रावधानों के उल्लंघन के अपराध के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। इस आदेश के तहत राज्य व केंद्र शासित प्रदेश को दंडात्मक कार्रवाई करने की शक्ति प्राप्त है।
वहीं, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) 2013 के तहत प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सर्तकता समिति, जिला शिकायत निवारण अधिकारियों, राज्य खाद्य आयोग द्वारा इसकी निगरानी की संस्थागत व्यवस्था की गई है।
मंत्री ने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार लाने के लिए मंत्रालय सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से पीडीएस ऑपरेशन को कंप्यूटरीकृत कर रहा है।
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इस योजना के तहत राशन कार्ड/लाभार्थियों का डिजिटलीकरण करके सप्लाई-चेन मैनेजमेंट का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है और इसमें पारदर्शिता लाने की कोशिश की जा रही है। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल (ई-पीओएस) डिवाइस का इस्तेमाल करके राशन की दुकानों का ऑटोमेशन किया जा रहा है।

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