अयोध्या केस: 1949 में केंद्रीय गुंबद के अंदर रामलला की मूर्तियां लगाई गईं

अयोध्या मामला साल दर साल आगे बढ़ता गया और फिर साल 1949 में विवादित ढांचे के बाहर केंद्रीय गुंबद के अंदर रामलला की मूर्तियां लगाई गईं। इसके बाद रामलला की मूर्तियों की पूजा का अधिकार हासिल करने के लिए गोपाल सिमला विशारद ने फैजाबाद जिला अदालत में याचिका दायर की। इधर निर्मोही अखाड़ा ने जमीन पर अधिकार दिए जाने के लिए याचिका दायर की।
जबकि इससे पहले अयोध्या में 1859 में ब्रिटिश शासकों ने विवादित स्थल पर बाड़ लगा दी और परिसर के भीतरी हिस्से में मुसलमानों को और बाहरी हिस्से में हिन्दुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दी थी। निर्मोही अखाड़े के महंत रघुबर दास ने फैजाबाद कोर्ट में मस्जिद परिसर में मंदिर बनवाने की अपील की पर कोर्ट ने मांग खारिज कर दी। इसके बाद सालों तक यह मामला चलता रहा है। 1934 फिर दंगे हुए और मस्जिद की दीवार और गुंबदों को नुकसान पहुंचा। ब्रिटिश सरकार ने दीवार और गुंबदों को फिर से बनवाया। 
अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद मामले में 40 दिन तक लगातार दलीलें सुनने के बाद उच्चतम न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मुद्दे पर 9 नवंबर से फैसला आएगा। सर्वोच्च अदालत का फैसला आने के बाद 160 साल से भी ज्यादा पुराने समय से चल रहे इस ऐतिहासिक मुकदमे का समाधान हो जाने की उम्मीद है।
अयोध्या विवाद: ब्रिटिश शासकों ने 1859 में दी हिन्दुओं को प्रार्थना करने की अनुमति 

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