Emotional story:अब इस महिला को मिलेगी नगर निगम में नौकरी, महापौर ने दिया आदेश

लखनऊ , कहते हैंकि कब किस घड़ी मौत आ जाये यह किसी को नहीं पता होता। मौत मरने वाले को तो अपने आगोश में ले तो लेती हैं लेकिन उसके साथ कई और मौसम लोगो को भी मरने पर मजबूर करती हैं। ऐसा ही हुआ मंजिता के साथ जब अचानक पति की मौत की खबर आई। मानो मंजिता के पैरो तले ज़मी खिसक गयी हो। मंजिता का रो रो कर बुरा हाल हो रहा था। तीन बच्चों के साथ पहाड़ जैसी ज़िन्दगी कैसे कटेगी। यह सोच कर वो परेशान हो उठती। उसके इस दुःख की घडी में जब लखनऊ की महापौर उसके घर पहुंची तो मंजिता और बच्चों को देख वो खुद भावुक हो गयी और उन्होंने दे डाला यह निर्देश।
आइये बताते हैं क्या घटी थी पूरी घटना
नगर निगम के कार्यदायी संस्था के दिवंगत कर्मचारी शिवकुमार की पत्नी मंजीता अपने 3 बच्चों अतुल, अंस और शक्ति के साथ सुबह महापौर संयुक्ता भाटिया से उनके श्रृंगार नगर स्थित आवास पर मिलने पहुंची। इस दौरान दिवंगत शिवकुमार की पत्नी मंजीता ने महापौर से भावुक होते हुए कहा कि अब परिवार को सहारा देने वाला कोई और नही बचा है 3 बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेंदारी भी मेरे कंधों पर है।
जिसपर महापौर संयुक्ता भाटिया ने भावुक हुई मंजीता को ढांढस बांधते हुए कहा कि आपके पति हमारे नगर निगम में कार्यरत थे, महापौर ने तुरंत नगर आयुक्त और आर०आर० प्रभारी राम नगीना त्रिपाठी को फोन पर दिवंगत कर्मचारी की पत्नी को नगर निगम में उनकी दक्षता के अनुरूप सरल कार्य देने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। ताकि इनके बच्चों का पालन पोषण ठीक प्रकार से हो सके।
शिवकुमार की ऐसे हुयी थी मौत
हम आपको बता दे कि नगर निगम में कार्यदायी संस्था के दिवंगत कर्मचारी शिवकुमार की करेंट लगने से शिवरी प्लांट पर हादसे में मृत्यु की जानकारी देर रात 12 बजे उनके परिवार के सदस्यों द्वारा प्राप्त होने पर भीषण बारिश में भी अपनी प्राइवेट गाड़ी से बिना स्टाफ और सुरक्षा के ट्रामा सेंटर पहुँच कर महापौर संयुक्ता भाटिया ने शोकाकुल परिवार को सांत्वना प्रदान की थी। इसके साथ ही नगर निगम द्वारा कर्मचारी के परिवार को सांत्वना राशि के रूप में दिए जा रहे 1 लाख को बढ़ाकर 2 लाख रुपये भी करवाये थे।
महापौर संयुक्ता भाटिया ने दिवंगत शिवकुमार की पत्नी मंजीता को आश्वस्त किया कि वो पूरी तरह से शोकाकुल परिवार के साथ है इसके पश्चात भी अगर परिवार को कोई आवश्यकता होती है तो उनके घर के दरवाजे 24 घंटे शोक संतप्त परिवार के लिए खुले है।

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