नियम: सरकारी जमीन पर बने सभी अस्पतालों में गरीबों को मिलेगा मुफ्त इलाज

दिल्ली में सरकारी जमीन पर बने सभी निजी अस्पतालों को गरीब मरीजों का निशुल्क इलाज करना होगा। भले ही अस्पताल को जमीन नीलामी में बाजार भाव से ही क्यों न मिली हो। डीडीए ने हाईकोर्ट में यह जानकारी दी है।
चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस सी. हरिशंकर की पीठ के समक्ष दाखिल हलफनामे में डीडीए ने कहा कि अस्पतालों को जमीन देते समय यह शर्त रखी जाती है कि उन्हें केंद्र और दिल्ली सरकार द्वारा समय-समय पर बदले जाने वाले नियमों का पालन करना होगा। अगर वे नियम नहीं मानते हैं तो अस्पताल को आवंटित जमीन रद्द कर दी जाएगी। 
डीडीए ने यह भी कहा है कि यदि सरकार की तरफ से इलाज नहीं देने की शिकायत होती है तो कानून के दायरे में कार्रवाई की जाएगी। डीडीए 2002 से समितियों को अस्पताल चलाने के लिए सस्ती दरों पर जमीन नहीं दे रहा है। तब से नीलामी के जरिए जमीन आवंटित की जा रही है।.
याचिका के जवाब में डीडीए का हलफनामा –
गैर सरकारी संगठन जस्टिस फॉर ऑल की ओर से दाखिल जनहित याचिका के जवाब में डीडीए ने यह हलफनामा दिया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकारी जमीन पर बने 50 से अधिक निजी अस्पताल गरीबों को निशुल्क इलाज नहीं दे रहे हैं। अस्पतालों का कहना है कि उनके भूमि आवंटन पत्र में ऐसी कोई शर्त नहीं है। किसी को निशुल्क इलाज मुहैया कराने की जिम्मेदारी उनकी नहीं है।

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