‘मिराज 2000 जेट विमानों ने पलभर में बदल दिया था करगिल युद्ध का रुख’

वायुसेना प्रमुख बी एस धनोआ ने सोमवार को कहा कि 1999 में करगिल युद्ध के दौरान मिराज..2000 जेट विमानों के इस्तेमाल से युद्ध का रुख भारत के पक्ष में पलट गया था। उन्होंने साथ ही कहा कि तब इस बहुद्देश्यीय विमान के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया चल रही थी जिसे अभियान में तैनात करने के लिए ”तेज” कर दिया गया था।
धनोआ ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मिराज..2000 के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए उसका टारगेटिंग पॉड्स और 1000..लेजर-निर्देशित बम (एलजीबी) से एकीकरण का काम रिकॉर्ड 12 दिन में पूरा किया गया था। धनोआ के साथ मध्य कमान के एयर आफिसर कमांडिंग इन चीफ एयर मार्शल राजेश कुमार भी मौजूद थे। उन्होंने कहा, ”विमान उन्नयन का काम जारी है और मिराज…2000 विमान के एक स्वाड्रन का उन्नयन किया जा चुका है।
एक सवाल के जवाब में कुमार ने कहा कि दो अगस्त 2002 को भारतीय वायुसेना ने जम्मू कश्मीर के केल क्षेत्र में एक प्रतिकूल लक्ष्य पर हमला किया था ताकि इसका एक स्पष्ट संदेश दिया जा सके कि ”आप यह नहीं कर सकते और निश्चित तौर पर ”हम कोई युद्ध शुरू करना नहीं चाहते।”
बालाकोट हमले के बाद भारत में नहीं घुसा था पाक का विमान
वायुसेना प्रमुख इससे पहले टाइगर हिल पर हमले और उस पर कब्जे के ‘ड्रामैटिक रीनैक्टमेंट में शामिल हुए। इसका आयोजन बेस पर टाइगर हिल पर भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा हमले के 20 वर्ष पूरा होने के मौके पर किया गया था। धनोआ ने इस बात पर जोर दिया कि मिराज 2000 को तैनात करने और जमीनी बलों को हवाई समर्थन मुहैया कराने से 1999 के युद्ध का रुख भारत के पक्ष में पलट गया था।
धनोआ ने कहा, ”उस समय टाइगर हिल एक संदेश भी था कि आप चाहे जितने भी छोटे हों, आप जिस भी खतरनाक स्थिति में बैठे हों, हम आपको खोजकर आप पर हमला कर सकते हैं।” हाल में अरुणाचल प्रदेश में वायुसेना के एएन..32 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के संबंध में पूछे गए एक सवाल पर धनोआ ने कहा, ”एएन..32 विमान पर्वतीय क्षेत्रों में उड़ना जारी रखेगा। हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।”
उन्होंने कहा, ”हम और आधुनिक विमान प्राप्त करने की प्रक्रिया में हैं जिसे प्राप्त होने पर महत्वपूर्ण भूमिका में लगाया जाएगा, एनएन..32 विमान को हटा दिया जाएगा और उसका इस्तेमाल परिवहन एवं प्रशिक्षण उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।” इस महीने अरुणाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र के घने जंगलों में हुई इस दुर्घटना में परिवहन विमान में सवार सभी 13 वायुसेना कर्मियों की मौत हो गई थी।
एयर मार्शल कुमार ने मिराज..2000 के उन्नयन पर कहा कि इससे ”उसका जीवन 20 वर्ष बढ़ जाएगा और नये हथियार और नयी प्रणाली आएगी।” उन्होंने कहा, ”एचएएल ने विमान के एक स्क्वाड्रन की आपूर्ति कर दी है और वे ऐसा आगे भी करते रहेंगे। विमान के एक स्क्वाड्रन में 18 विमान होते हैं।”

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