Health Tips : कब्ज नहीं छीनेगा बच्चे की किलकारी, ये Expert tips आएंगे आपके काम

Health Tips : कब्ज नहीं छीनेगा बच्चे की किलकारी, ये Expert tips आएंगे आपके काम

छुटपन में अकसर हर बच्चा कब्ज की समस्या का शिकार बनता है। अपने बच्चे को इस समस्या से कैसे बचाएं, बता रही हैं रश्मि उपाध्याय

बच्चा हो या बड़ा, पेट इंसान के शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है। यदि पेट दुरुस्त और साफ है तो व्यक्ति कई बीमारियों से बच सकता है। पर आजकल की जीवनशैली और खानपान के बीच पेट को सेहतमंद और साफ रख पाना किसी चुनौती से कम नहीं है। अगर पेट साफ नहीं होता है तो कब्ज की समस्या सबसे पहले जन्म लेती है। कब्ज होने से मल कड़ा हो जाता है, जिसे निकालने में काफी दिक्कत होती है। इतना ही नहीं, कब्ज से पेट में दर्द होना और पाइल्स होना भी आम बात है। 

ध्यान देने वाली बात यह है कि यह समस्या बड़ों के साथ ही बच्चों को भी अपना शिकार बनाती है। जब बच्चा दूध के अलावा अन्य चीजों का सेवन शुरू करता है, तब उन्हें अकसर कब्ज की समस्या होती है। कुछ बच्चों को तो मामूली कब्ज होती है, जबकि कुछ बच्चों में यह इतना भयंकर रूप ले लेती है कि उन्हें असहनीय पेट दर्द और मल के साथ खून निकलने जैसी समस्या का भी सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में अभिभावकों द्वारा बच्चों को दवाओं और अन्य चीजें बहुत सोच-समझकर देनी चाहिए। बाजार में मिलने वाले उत्पादों और दवाओं की बजाय अगर आप बच्चों में कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करेंगे तो शिशु को जल्दी फायदा मिलेगा। 

छह माह से छोटे शिशु
छह माह से छोटे बच्चों के लिए संपूर्ण पोषण प्रदान करने का सबसे बेहतर तरीका मां का दूध होता है। जो बच्चे नियमित रूप से मां के दूध का सेवन करते हैं, उनमें कब्ज जैसी समस्या बहुत कम देखी जाती है। लेकिन जो शिशु मां के दूध की बजाय फॉर्मूला मिल्क पीते हैं, उनमें कब्ज की समस्या जल्दी जन्म लेती है। हालांकि कई बार शिशु मां का दूध पीने से भी कब्ज की चपेट में आते हैं। इसका कारण मां की डाइट में पोषण संबंधी तत्वों की कमी का होना है। अगर आपको शिशु में बुखार आना, पेट फूलना, मल का कड़ा होना और दूध पीने से मना करने जैसे लक्षण दिखें तो बिना देरी के डॉक्टर से संपर्क करें। 

– चूंकि शिशु मां का दूध पीता है, इसलिए जरूरी है कि मां अपनी डाइट पर ध्यान दें। यदि मां अपनी डाइट में हरी सब्जियां, फल और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें तो शिशु को कब्ज की समस्या नहीं होगी। 
– शिशु के शौच करने का एक समय निर्धारित करें। कई बार शौच करने का अनियमित समय भी कब्ज का कारण बनता है। 
– अगर आप अपने शिशु को फॉर्मूला मिल्क दे रही हैं तो एक बार इसे बदल कर देखें। ऐसा करने से हो सकता है कि शिशु को कब्ज से आराम मिले।  
– शिशु का पेट बिल्कुल भी खाली न रखें। आपको सख्ती से यह देखना होगा कि आपके शिशु ने आज कितना दूध पिया है। अगर आपको लगता है शिशु का पेट खाली है तो उसे पर्याप्त मात्रा में दूध पिलाएं।

जब बच्चा हो छह माह से बड़ा
जब शिशु 6 महीने का हो जाता है तो अभिभावक कोशिश करते हैं कि उसकी डाइट में दूध के अलावा अन्य चीजें भी शामिल की जाएं। अगर दूध के अलावा आप शिशु को जो चीजें खिला रही हैं वो हेल्दी हैं, तब तो ठीक है, लेकिन यदि ऐसा नहीं है तो शिशु को कब्ज की समस्या होने लगती है। याद रखें, जब तक शिशु एक साल का नहीं हो जाता, कोशिश करें कि उसका मुख्य आहार दूध ही होना चाहिए। यदि आप शिशु को ज्यादा सख्त चीजें खिलाएंगी तो उसे कब्ज होना तय है। छह महीने के बाद बच्चे की डाइट में दाल का पानी, फल या फलों का जूस और पानी की पर्याप्त मात्रा ही शामिल करें। इसके अलावा बच्चे को कुछ नया खिलाने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें। छह महीने से बड़े बच्चे में यदि कब्ज की समस्या बनती है तो नीचे दिए गए टिप्स को अपनाएं। : 

– यदि बच्चा कब्ज का शिकार होता है तो उसे जीरा, हींग और देसी घी से युक्त दलिया या मूंग दाल की खिचड़ी खिलाएं। 
– आलू बुखारा कब्ज को बहुत जल्दी काटता है। यदि आलू बुखारा उपलब्ध है तो बच्चे को जरूर खिलाएं।
– गाजर से बेहतर कब्ज का कोई इलाज नहीं है। यदि बच्चा गाजर खाने से आनाकानी करता है तो गाजर को घिसकर दूध में पकाकर खिलाएं। 
– मैदे से बनी चीजें जैसे- बिस्कुट, मैगी, ब्रेड और नमकीन व अधिक मिर्च-मसाले वाली चीजें जैसे- बर्गर, नूडल्स, पिज्जा और समोसा आदि बच्चे को बिल्कुल न खिलाएं। 
– हींग और पानी से बने पेस्ट से बच्चे की नाभि के आसपास हल्के हाथों से मसाज करने से भी कब्ज की समस्या जल्दी सही होती है।
– जब वह शौच कर रहा हो तो उसे जोर देने के लिए न कहें। ऐसा करने से शिशु के मलाशय की दीवार फट सकती है, जो पाइल्स का रूप ले सकती है। 

(आयुर्वेदिक डॉक्टर उमाशंकर से बातचीत पर आधारित)

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