कहीं आपको भी तो नहीं है फूड एलर्जी? जानिए इसके बारे में सबकुछ

कहीं आपको भी तो नहीं है फूड एलर्जी? जानिए इसके बारे में सबकुछ

जिंदा रहने के लिए खाना जरूरी है, पर कुछ लोगों को खाने का यही निवाला अस्पताल तक पहुंचा देता है। पिछले कुछ सालों में खाने से होने वाली एलर्जी के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। क्या है यह एलर्जी और कैसे इससे बचें, बता रही हैं स्वाति गौड़

अकसर आपने किसी न किसी को कहते सुना होगा कि फलां खाने की चीज उन्हें सूट नहीं करती या फलां खाने की चीज से उन्हें एलर्जी है। यह एलर्जी तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रही है। यही नहीं, यदि माता-पिता दोनों को फूड एलर्जी है तो इस बात की 75 फीसदी आशंका रहती है कि उनके होने वाले बच्चे को भी किसी न किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी जरूर होगी। पर कभी आपने सोचा है कि खाने-पीने की चीजों से होने वाली यह फूड एलर्जी असल में होती क्या है? इससे क्या नुकसान होते हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है? वैसे ऐसा बिल्कुल जरूरी नहीं है कि फूड एलर्जी सभी लोगों को हो, लेकिन जिस किसी को भी यह समस्या होती है, उसे खाने-पीने के मामले में सतर्कता जरूर बरतनी चाहिये। 

क्या है फूड एलर्जी : जब हमारा शरीर किसी खास प्रकार के खाने-पीने की चीज को स्वीकार नहीं करता और उसे सेहत के लिए हानिकारक समझने लगता है, तो शरीर पर उसकी वजह से रिएक्शन शुरू हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में हमारे शरीर में से एक खास किस्म का सुरक्षात्मक केमिकल हिस्टेमाइन स्रावित होने लगता है। नतीजतन, शरीर पर लाल-लाल चकत्ते या रैशेज पड़ने लगते हैं, सूजन आ जाती है, उल्टी, चक्कर आना और सांस लेने में तकलीफ या डायरिया के लक्षण भी सामने आ सकते हैं। 

कितने प्रकार की होती है यह एलर्जी : यूं तो एलर्जी खाने-पीने की वस्तुओं से लेकर वातावरण और दवाएं आदि किसी भी चीज से हो सकती है। लेकिन फिर भी मुख्यत: ग्लूटन युक्त खाद्य पदार्थ (लस से युक्त), डेयरी उत्पाद, सोयाबीन, अंडों और शैलफिश से होने वाली एलर्जी ज्यादा देखने को मिलती है। किसी-किसी व्यक्ति को ज्यादा नमी वाली जगह में सांस लेने से भी एलर्जी हो सकती है। कुछ अवस्थाओं में एलर्जी का प्रभाव तुरंत दिखने लगता है। पर कुछ परिस्थितियों में एलर्जी के लक्षण नजर आने में 48 से 72 घंटे का भी समय लग सकता है।  

इनसे होती है सबसे ज्यादा एलर्जी
सोयाबीन:
यूं तो सोयाबीन शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है, लेकिन कभी-कभी इसमें पाया जाने वाला प्रोटीन ही एलर्जी का मुख्य कारण बन जाता है। इस एलर्जी की वजह से नाक बहना, खुजली होना, मुंह में झनझनाहट, सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिख सकते हैं। ऐसे लोगों को सोयायुक्त किसी भी तरह के खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिये। 

गेहूं: कुछ लोगों को गेहूं में पाए जाने वाले प्रोटीन से भी एलर्जी की समस्या हो जाती है। बच्चे विशेष रूप से इससे प्रभावित होते हैं। इसमें भी अपच, उल्टी, शरीर पर चकत्ते पड़ जाना, सूजन आ जाना और उल्टी आने जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। जिन्हें सिर्फ गेहूं में पाए जाने वाले प्रोटीन से एलर्जी होती है, वह अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन आराम से कर सकते हैं। 

मछली: मछली खाने से होने वाली एलर्जी सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। विशेष रूप से शेलफिश जैसे श्रिम्प, झींगा और केकड़े से होने वाली एलर्जी खासा गंभीर रूप ले सकती है। 

गाय का दूध: जब छह महीने से कम उम्र के बच्चों को गाय का दूध दिया जाता है तो उन्हें अपच व डायरिया जैसी समस्या होने लगती है। यह गाय के दूध से होने वाली एलर्जी के लक्षण हैं। हालांकि 90 फीसदी से अधिक बच्चे तीन साल की उम्र तक आते-आते गाय के दूध से तालमेल बिठा लेते हैं। यदि मां को लगे कि उसके शिशु में एलर्जी के लक्षण उभर रहे हैं तो बच्चे के आहार से गाय का दूध व उससे बने उत्पाद बिल्कुल दूर कर देने चाहिए। 

सूखे मेवे: कभी-कभी  कुछ व्यक्तियों को बादाम, काजू, पिस्ता, अखरोट और मूंगफली जैसे मेवे खाने से सांस लेने में तकलीफ, गले में खिंचाव या खराश, मुंह में झनझनाहट या शरीर पर रैशेज होने जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। परहेज नहीं रखने से यह एलर्जी बहुत गंभीर भी साबित हो सकती है। 

अंडे: अंडों से होने वाली एलर्जी छोटे बच्चों में सर्वाधिक देखने को मिलती है, हालांकि किशोरावस्था आने तक उनमें इसके लक्षण खत्म हो जाते हैं।  

क्या है समाधान
इस बात को समझना बहुत जरूरी है कि कोई चीज हजम न कर पाना और किसी चीज से एलर्जी होने में अंतर होता है, जिसका सही निर्णय डॉक्टरी जांच के बाद ही लिया जा सकता है। इसके लिए आमतौर पर कुछ सामान्य चीजों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

आहार संबंधी आदतें: आपका डॉक्टर आपसे अपने नियमित आहार का चार्ट और टाइम-टेबल बनाने के लिए कह सकता है, जिसके विश्लेषण के बाद नतीजे सामने आते हैं। 

स्किन प्रिक टेस्ट: इस टेस्ट के अंतर्गत एक छोटी-सी बेहद बारीक सुई के माध्यम से शरीर में एलर्जी पैदा करने वाले संभावित खाद्य पदार्थ को डाला जाता है और फिर शरीर में उसकी प्रतिक्रिया देखी जाती है। 

ब्लड टेस्ट: कुछ विशेष परिस्थितियों में शरीर से ब्लड सैंपल लेकर आईजीई एंटी बॉडीज के स्तर की जांच की जाती है। 

ओरल फूड टेस्ट: इस टेस्ट के तहत डॉक्टर अपनी देखरेख में एलर्जी करने वाले खाद्य पदार्थों की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाते हुए मरीज को उक्त खाद्य पदार्थ खाने के लिए कहते हैं, ताकि उससे होने वाले लक्षणों की जांच की जा सके। 

ये भी हैं काम की बातें

फूड एलर्जी से बचने का कोई पुख्ता इलाज अभी तक नहीं है। इसे सिर्फ नियंत्रित किया जा सकता है। अगर आप फूड एलर्जी की शिकार हैं तो उसे नियंत्रित करने के लिए कुछ तरीके अपना सकती हैं: 

– बाहर निकलते समय हमेशा मास्क पहनें। 
– संतुलित आहार लें। 
– शरीर में पानी की कमी न होने दें।
– हर बार खाने से पहले हाथ अच्छी तरह से धोएं।
– नियमित रूप से व्यायाम अवश्य करें।
– विटामिन बी5 को अपने आहार में शामिल करें। यह फूड एलर्जी को रोकने का प्राकृतिक तरीका है।  
– तनाव न लें।  
– विटामिन-ए, सी और ई युक्त खाद्य पदार्थ, जिंक और फ्लैक्स सीड ऑयल का सेवन अवश्य करें।
– ज्यादा से ज्यादा मात्रा में ताजे फल और सब्जियां खाएं।  
– अपने आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा और सेहतमंद बनाए रखें।  

(डॉ. सोनाली धीमन, न्यूट्रिशनिस्ट एवं डाइटीशियन, अमनदीप हॉस्पिटल से बातचीत पर आधारित)

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