लोकसभा नतीजें से प्रभावित होंगी मध्य प्रदेश और कर्नाटक की सरकारें

लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल अनुमानों से 23 मई को आने वाले असल नतीजों की अटकलों के बीच कुछ राज्य सरकारों को लेकर भी सियासत गरमा गई है।  माना जा रहा है कि केंद्र में भाजपा व एनडीए की पूर्ण बहुमत के साथ वापसी की स्थिति में कर्नाटक व मध्य प्रदेश की विपक्ष की गठबंधन सरकारों को दिक्कत हो सकती है। 
कर्नाटक में कांग्रेस व जद (एस) की गठबंधन सरकार है, जबकि मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार सपा, बसपा व निर्दलीय विधायकों के समर्थन पर टिकी है। कर्नाटक में बीते साल भाजपा के सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बाद सरकार बनाने का मौका तो मिला, लेकिन वह जरूरी बहुमत नहीं जुटा सकी। इसके बाद कांग्रेस ने तीसरे नंबर की पार्टी जद एस के साठ गठबंधन कर सरकार बनाई है। राज्य की 225 (एक मनोनीत सदस्य समेत) सदस्यीय विधानसभा में दो सीटें रिक्त हैं। ऐसे में बहुमत का आंकड़ा 112 पर है।  भाजपा के 104 विधायक हैं और उसके साथ एक निर्दलीय व एक केपीजेपी का विधायक है। भाजपा को बहुमत के लिए छह और विधायकों की जरूरत है। दूसरी तरफ सत्तारूढ़ गठबंधन में जद (एस) के 37, कांग्रेस के 78 व बसपा का एक विधायक है और उसकी संख्या 116 है।
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मध्य प्रदेश में पांच सीटों से पिछड़ गई थी भाजपा मध्य प्रदेश में भाजपा कांग्रेस से पांच सीटों से पिछड़कर सरकार नहीं बना पाई थी। राज्य की 231 सदस्यीय विधानसभा (एक मनोनीत सदस्य को मिलाकर) में बहुमत का आंकड़ा 116 पर है। सत्तारूढ़ कांग्रेस के पास 113 विधायक हैं और उसे चार निर्दलीय, दो बसपा व एक सपा विधायक का समर्थन है। दरअसल भाजपा कर्नाटक व मध्य प्रदेश की हार पचा नहीं पाई थी। बहुमत से बहुत कम अंतर से दूर होने के कारण उसकी नजर दोनों राज्यों पर हैं। 
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भाजपा कर सकती हैं सेंधमारीइन दोनों राज्यों में सरकार बनने के बाद से ही कुछ विधायकों के पाला बदलने की अटकलें चलती रही हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा की नजर भी इन दोनों राज्यों पर है जहां कांग्रेस में सेंध लगाकर वह अपनी सरकार बना सकती है। अगर इन दोनों राज्यों में लोकसभा के नतीजे कांग्रेस के खिलाफ व भाजपा के पक्ष में जाते हैं तो समीकरण बदल सकते हैं। केंद्र में भाजपा की सरकार बनने की स्थिति में दोनों राज्यों में दलबदल होने की संभावनाएं बढ़ेगी।  

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