विशेषज्ञ की राय: भाजपा की रणनीति हावी रहने के संकेत

लोकसभा चुनाव के परिणाम आने में अब दो दिन बाकी हैं, लेकिन एग्जिट पोल के नतीजों से यह संकेत मिल रहे हैं कि एनडीए बहुमत हासिल करने में सफल रहेगा। हालांकि, भाजपा की सीटों की संख्या को लेकर सही तस्वीर 23 मई को नतीजे आने पर ही साफ होगी। 
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चुनाव नतीजे अगर एग्जिट पोल के मुताबिक रहते हैं तो इससे साफ है कि चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की रणनीति के साथ-साथ मोदी का नेतृत्व हावी रहा है। 
लोकसभा चुनावों को लेकर शुरू से ही एक बात कही जा रही थी कि यह चुनाव उम्मीदवारों और दलों के बीच नहीं लड़ा जा रहा है, बल्कि शीर्ष नेताओं की छवि पर केंद्रित है। भाजपा ने अपने प्रचार अभियान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईद-गिर्द केंद्रित किया था। दूसरा, पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट में एयर स्ट्राइक के चलते मोदी के नेतृत्व को जनता के बीच काफी सराहना मिली थी। निश्चित रूप से इसका प्रभाव चुनावों पर भी पड़ा है। माना जा रहा है कि भाजपा जनता में यह संदेश देने में भी कामयाब रही कि विपक्ष के पास प्रधानमंत्री मोदी का विकल्प नहीं है। राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार दुबे कहते हैं कि मोदी के नेतृत्व के साथ-साथ भाजपा की रणनीति भी अहम रही है। पार्टी ने पिछले पांच साल में दर्जनभर राज्यों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया। इनमें पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और पूर्वोत्तर के आठ राज्य शामिल हैं। इन राज्यों में भाजपा ने जमीनी स्तर पर काम करके खुद को मजबूत किया। उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन बनने के बाद भाजपा ने इन राज्यों के लिए खास रणनीति बनाई, ताकि यूपी में होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सके। एग्जिट पोल के संकेत बताते हैं कि भाजपा की यह रणनीति काफी हद तक सफल रही है।  
जानकारों का कहना है कई राज्यों जैसे पंजाब, केरल व तलिनाडु में भाजपा को अपेक्षित सफलता मिलती नहीं दिख रही। दरअसल, मोदी के नेतृत्व का असर भले ही देश में है, पर भाजपा ने अभी इन राज्यों में जमीनी स्तर पर जाकर काम नहीं किया है। ऐसे में नेतृत्व के साथ-साथ जमीनी स्तर पर आधार मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है।

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