इस्लामिक कार्यक्रम में इस मौलाना ने भागवत गीता का संदर्भ देकर कही ये बात तो बजने लगी तालियां

मेरठ। जब हम अपनी वालिदा के पेट में थे, तो उस समय हमें अपने मजहब, तबके, जाति और रंग का कोई सबब नहीं था। इंसान ये सब अलगाव की बातें अपने खुद के फायदे के लिए सीखता और सिखाता है। ईश्वर जाति, धर्म और रंग आदि के आधार पर अपने बंदों से कोई भेदभाव नहीं करता। इन्सान बनाने के लिए हमें अल्लाह का शुक्रगुजार होना चाहिए। इस अवसर का उपयोग अच्छे-अच्छे कामों के लिए करना चाहिए। किसी भी समाज को आगे बढ़ने के लिए उन्हें अपने-अपने मजहब की किताबों में दी गई शिक्षा का पालन करना चाहिए। यह बातें देर रात मदरसा सिराजुल जिसौरा में आयोजित जलसे में कारी उस्मान ने कहीं।
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‘कुरान के बताए रास्ते पर चलना चाहिए’
कारी उस्मान ने कहा कि भागवत गीता भी कहती है कि भगवान एक है और वही सब कुछ करता है। ईश्वर, इस जगत में अधर्म के बढ़ने तथा लोगों को धर्म के मार्ग पर पुनः स्थापित करने के लिए अपना नुमाइन्दा भेजता है। ऐसे खुदा के बेटों के अन्तिम पैगम्बर, मोहम्मद साहब हैं। जिन्होंने हमेशा यह उपदेश दिया कि एक सच्चे मुसलमान को कुरान के बताए रास्ते पर बिना किसी को नुकसान पहुंचाए तथा दूसरों की भावनाओं का आदर करते हुए चलना चाहिए।
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‘भार्इचारे से समाज का सुधार’
जमीयत उलमा के कारी मुस्तफा ने जलसे को संबोधित करते हुए कहा कि हम अपने समाज का सुधार भाईचारे के आचरण से ही कर सकते हैं। कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी धर्म अथवा सम्प्रदाय से हो, अपने पवित्र धर्म ग्रन्थ के अनुकरण से ही यह समझ सकता है कि समस्त मानव जाति बराबर है। समाज में किसी भी इंसान का स्थान उसके अपने कर्म व आचरण से सुनिश्चित होता है। इसी प्रकार जो व्यक्ति नफरत और हिंसा फैलाता है, वह अपने मजहब व दुनिया का कभी भी भला नहीं कर सकता है। अल्लाह ऐसे लोगों को कभी प्यार नहीं करता और नहीं अपनाता है। अपने आपसे खुद अन्दर से किसी धर्म को मानने में कोई बुराई नहीं है। कोई भी मजहब फसाद तथा फितना फैलाने की इजाजत नहीं देता। किन्तु समस्या तब खड़ी होती है,जब कोई अपने धर्म का ठेकेदार बन जाता है तथा दूसरों के धर्म से नफरत करने लगता है। हमारे पैगम्बर मोहम्मद साहब का यह मार्ग नहीं है। सभी धर्मों के लोगों को चाहिए कि वे खुले दिमाग से अपने ग्रंथों तथा दिए गए निर्देशों का सम्मान व पालन करें। तभी उन्हें जीवन का सही मार्ग दिखाई पड़ेगा।
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